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Abdulla Asif
ye ilzaam bhi aap rakh do humeen par
ye ilzaam bhi aap rakh do humeen par | ये इल्ज़ाम भी आप रख दो हमीं पर
- Abdulla Asif
ये
इल्ज़ाम
भी
आप
रख
दो
हमीं
पर
फ़लक
आ
गिरा
है
ज़मीं
पे
कहीं
पर
सिकंदर
के
बारे
में
तुम
जानते
हो
मरा
था
वो
ज़ाफ़िर
वो
फ़ातेह
यहीं
पर
यक़ीं
का
पता
जब
मिला
है
गुमाँ
से
यक़ीं
क्यूँ
करूँँ
मैं
बताओ
यक़ीं
पर
- Abdulla Asif
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ब-चश्म-ए-अश्कबार
है
जबीं
ज़मीन
पर
मगर
ये
अश्क
जा
रहे
हैं
चर्ख़
की
तरफ़
Abdulla Asif
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कोई
संसार
में
उसके
जैसा
नहीं
होगा
भी
पर
मुझे
सिर्फ़
दिखता
नहीं
बस
न्यूटन
जी
की
आबरू
के
लिए
उड़
तो
सकता
हूँ
लेकिन
मैं
उड़ता
नहीं
ज़िन्दगी
मेरी
नज़रों
से
तू
गिर
चुकी
और
मैं
भी
गिरी
चीज़
रखता
नहीं
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Abdulla Asif
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घरों
से
दूर
रहने
में
बस
इतनी
ही
मुसीबत
है
किसी
की
याद
आएगी
किसी
को
याद
आओगे
Abdulla Asif
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जाने
वाले
कह
पाते
तो
कहते
आने
वालों
से
दुनिया
दोज़ख़
जैसी
ही
है
बस
में
हो
तो
मत
आना
Abdulla Asif
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मुहब्बत
नज़र
का
फ़क़त
हादसा
है
वो
ख़ुश
है
जो
इस
हादसे
से
बचा
है
वफ़ा
का
पता
पूछ
लो
हर
किसी
से
कहेंगे
यही
सब
वफ़ा
लापता
है
जिसे
भी
ज़रूरत
हो
ले
ले
मिरा
दिल
ये
पुरज़ा
निकम्मा
है
बेकार
का
है
रईसी
को
दौलत
से
तौला
है
तुमने
बताऊँ
तुम्हें
दिल
का
ये
मसअला
है
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Abdulla Asif
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