qasam jhoothi main khaana chahta hooñ | क़सम झूठी मैं खाना चाहता हूँ

  - Prabhat Adhar
क़समझूठीमैंखानाचाहताहूँ
वफ़ासच्चीजतानाचाहताहूँ
तुझेकाग़ज़बनानाचाहताहूँ
क़लमअपनीचलानाचाहताहूँ
रिवाज-ओ-रस्मसेबीमारहूँमैं
दवाउसकीकरानाचाहताहूँ
मुझेयेहोंठअपनेकाटनेहै
सबबपायलबनानाचाहताहूँ
कभीदिलतोड़करमैंलड़कियोंके
नदीउल्टीबहानाचाहताहूँ
मरीज़-ए-इश्क़हूँमैंविषदवाहै
सोइसकोआज़मानाचाहताहूँ
अमावसरातकीजोरौशनीहै
नज़रउससेेमिलानाचाहताहूँ
रसोईतेलसेख़ालीपड़ीहै
दिएघरकेबुझानाचाहताहूँ
ज़मींजिससेेमुझेउसनेनिकाला
वहीपरघरबनानाचाहताहूँ
नशेमेंहूँबतानामतनशेको
ज़रासाडगमगानाचाहताहूँ
यहाँसेदेखकरमैंबचपनेको
घड़ीवापसघुमानाचाहताहूँ
  - Prabhat Adhar
Share

profile-whatsappprofile-twitterprofile-fbprofile-copy