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Arzoo Lakhnavi
kah ke ye aur kuchh kaha na gaya
kah ke ye aur kuchh kaha na gaya | कह के ये और कुछ कहा न गया
- Arzoo Lakhnavi
कह
के
ये
और
कुछ
कहा
न
गया
कि
मुझे
आप
से
शिकायत
है
- Arzoo Lakhnavi
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पूछा
जो
उन
सेे
चाँद
निकलता
है
किस
तरह
ज़ुल्फ़ों
को
रुख़
पे
डाल
के
झटका
दिया
कि
यूँँ
Arzoo Lakhnavi
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भोली
बातों
पे
तेरी
दिल
को
यक़ीं
पहले
आता
था
अब
नहीं
आता
Arzoo Lakhnavi
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दिल
की
ज़िद
इस
लिए
रख
ली
थी
कि
आ
जाए
क़रार
कल
ये
कुछ
और
कहेगा
मुझे
मालूम
न
था
Arzoo Lakhnavi
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आँख
से
दिल
में
आने
वाला
दिल
से
नहीं
अब
जाने
वाला
घर
को
फूँक
के
जाने
वाला
फिर
के
नहीं
है
आने
वाला
दोस्त
तो
है
नादान
है
लेकिन
बे-समझे
समझाने
वाला
आँसू
पोंछ
के
हँस
देता
है
आग
में
आग
लगाने
वाला
है
जो
कोई
तो
ध्यान
उसी
का
आने
वाला
जाने
वाला
हुस्न
की
बस्ती
में
है
यारो
कोई
तरस
भी
खाने
वाला
डाल
रहा
है
काम
में
मुश्किल
मुश्किल
में
काम
आने
वाला
दी
थी
तसल्ली
ये
किस
दिल
से
चुप
न
हुआ
चिल्लाने
वाला
ख़्वाब
के
पर्दे
में
आता
है
सोता
पा
के
जगाने
वाला
इक
दिन
पर्दा
ख़ुद
उल्टेगा
छुप-छुप
के
तरसाने
वाला
'आरज़ू'
इन
के
आगे
है
चुप
क्यूँँ
तुम
सा
बातें
बनाने
वाला
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Arzoo Lakhnavi
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दो
तुंद
हवाओं
पर
बुनियाद
है
तूफ़ाँ
की
या
तुम
न
हसीं
होते
या
में
न
जवाँ
होता
Arzoo Lakhnavi
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