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Mahesh Natakwala
kaatee hai hijr ki shab tujhse visaal hogaa
kaatee hai hijr ki shab tujhse visaal hogaa | काटी है हिज्र की शब तुझ सेे विसाल होगा
- Mahesh Natakwala
काटी
है
हिज्र
की
शब
तुझ
सेे
विसाल
होगा
क्या
दिन
वो
ख़ूब-सूरत
और
बा-कमाल
होगा
- Mahesh Natakwala
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लंबा
हिज्र
गुज़ारा
तब
ये
मिलने
के
पल
चार
मिले
जैसे
एक
बड़े
हफ़्ते
में
छोटा
सा
इतवार
मिले
माना
थोड़ा
मुश्किल
है
पर
रोज़
दु'आ
में
माँगा
है
जो
मुझ
सेे
भी
ज़्यादा
चाहे
तुझको
ऐसा
यार
मिले
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Bhaskar Shukla
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ख़ुदा
करे
कि
तिरी
उम्र
में
गिने
जाएँ
वो
दिन
जो
हम
ने
तिरे
हिज्र
में
गुज़ारे
थे
Ahmad Nadeem Qasmi
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ख़ौफ़
आता
है
अपने
साए
से
हिज्र
के
किस
मक़ाम
पर
हूँ
मैं
Siraj Faisal Khan
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बिछड़
जाएँगे
हम
दोनों
ज़मीं
पर
ये
उस
ने
आसमाँ
पर
लिख
दिया
है
Siraj Faisal Khan
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हिज्र
में
इश्क़
यूँँ
रखा
आबाद
हिचकियाँ
तन्हा
तन्हा
लेते
रहे
Siraj Tonki
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किसी
बे-वफ़ा
से
बिछड़
के
तू
मुझे
मिल
गया
भी
तो
क्या
हुआ
मेरे
हक़
में
वो
भी
बुरा
हुआ
मेरे
हक़
में
ये
भी
बुरा
हुआ
Mumtaz Naseem
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नाम
पे
हम
क़ुर्बान
थे
उस
के
लेकिन
फिर
ये
तौर
हुआ
उस
को
देख
के
रुक
जाना
भी
सब
से
बड़ी
क़ुर्बानी
थी
मुझ
से
बिछड़
कर
भी
वो
लड़की
कितनी
ख़ुश
ख़ुश
रहती
है
उस
लड़की
ने
मुझ
से
बिछड़
कर
मर
जाने
की
ठानी
थी
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Jaun Elia
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'मुनीर'
अच्छा
नहीं
लगता
ये
तेरा
किसी
के
हिज्र
में
बीमार
होना
Muneer Niyazi
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मैं
न
सोया
रात
सारी
तुम
कहो
बिन
मेरे
कैसे
गुज़ारी,
तुम
कहो
हिज्र,
आँसू,
दर्द,
आहें,
शा'इरी
ये
तो
बातें
थीं
हमारी,
तुम
कहो
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Prakhar Kanha
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हिज्र
में
तुमने
केवल
बाल
बिगाड़े
हैं
हमने
जाने
कितने
साल
बिगाड़े
हैं
Anand Raj Singh
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तुम्हें
जब
देखता
हूँ
होश
अपने
मैं
खो
देता
हूँ
जुदाई
के
तसव्वुर
से
ही
तुम
सेे
मैं
रो
देता
हूँ
ख़ुदा
तू
बस
मुझे
वो
गुल
बना
जिसको
वो
भी
चू
में
तुझे
बदले
में
जो
भी
चाहिए
ले
मैं
वो
देता
हूँ
मुझे
तू
कर
दे
उसका
पू
रा
मुतक़ाबिल
न
दे
कोई
रक़ाबत
में
हमेशा
ही
मैं
सब
कुछ
बस
खो
देता
हूँ
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Mahesh Natakwala
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ज़हर
ये
हमने
तो
हर
शब
ही
पिया
है
फ़ोन
का
उसके
तसव्वुर
ही
किया
है
शोर
होता
ही
नहीं
है
इश्क़
में
तो
गर
किया
है
तो
दिखावा
ही
किया
है
लोग
जिसको
ज़िन्दगी
कहते
है
ना
अब
हमने
तो
उसका
तसव्वुर
ही
किया
है
ज़िन्दगी
का
दाम
कोई
हम
सेे
पूछो
हमने
क़तरों
में
समुंदर
को
जिया
है
मुझकों
अपना
कहने
वालों
तुम
बताओ
तुमने
ख़ातिर
मेरे
अब
तक
क्या
किया
है
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Mahesh Natakwala
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नाख़ुदा
मेरा
नहीं
है
कोई
भी
इस
दरिया
में
सब
मेरे
अपने
ही
मुझको
छोड़कर
जाते
रहे
Mahesh Natakwala
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कोई
तो
इस
रोग
की
अब
बस
दवा
दो
इश्क़
हैं
गर
ये
तो
फिर
उसको
सदा
दो
चाहता
हैं
वो
तमाशा
हो
तो
फिर
हो
आज
उसको
तुम
जी
भर
के
वो
मज़ा
दो
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Mahesh Natakwala
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मिरी
नादानी
पर
रोऊँ
कहाँ
जाकर
मेरा
ग़म
कोई
ले
भी
तो
नहीं
सकता
Mahesh Natakwala
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