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A R Sahil "Aleeg"
vafaa ka zikr karenge jafaa ke mausam men
vafaa ka zikr karenge jafaa ke mausam men | वफ़ा का ज़िक्र करेंगे जफ़ा के मौसम में
- A R Sahil "Aleeg"
वफ़ा
का
ज़िक्र
करेंगे
जफ़ा
के
मौसम
में
जो
रूह-ए-इश्क़
की
कोई
किताब
लिक्खेंगे
- A R Sahil "Aleeg"
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इक
हुनर
है
जो
कर
गया
हूँ
मैं
सब
के
दिल
से
उतर
गया
हूँ
मैं
Jaun Elia
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हमारा
इल्म
बूढ़ा
हो
रहा
है
किताबें
धूल
खाती
जा
रही
हैं
Kaif Uddin Khan
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रदीफ़ो-क़ाफ़िया-ओ-बह'र
का
भी
इल्म
है
लाज़िम
फ़क़त
दिल
टूट
जाने
से
कोई
शाइर
नहीं
बनता
Avtar Singh Jasser
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मैंने
कल
शब
चाहतों
की
सब
किताबें
फाड़
दीं
सिर्फ़
इक
काग़ज़
पे
लिक्खा
लफ़्ज़-ए-माँ
रहने
दिया
Munawwar Rana
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उसने
पूछा
था
पहले
हाल
मेरा
फिर
किया
देर
तक
मलाल
मेरा
मैं
वफ़ा
को
हुनर
समझता
था
मुझपे
भारी
पड़ा
कमाल
मेरा
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Subhan Asad
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बेवफ़ाई
ने
तिरी
मुझको
दिया
है
ये
हुनर
बस
यार
दुनिया
में
कहाँ
हर
भाग्य
में
ये
फ़न
लिखा
है
Harsh saxena
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यूँँ
ही
बस
वो
मुझको
छोड़
के
सब
सेे
मिलता
रहता
है
बच्चा
भी
तो
ग़लत
किताबें
रख
लेता
है
बस्ते
में
Shahnaz Parveen Sahar
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हम
भी
दरिया
हैं
हमें
अपना
हुनर
मालूम
है
जिस
तरफ़
भी
चल
पड़ेंगे
रास्ता
हो
जाएगा
Bashir Badr
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पा
ए
उम्मीद
प
रक्खे
हुए
सर
हैं
हम
लोग
हैं
न
होने
के
बराबर
ही
मगर
हैं
हम
लोग
तू
ने
बरता
ही
नहीं
ठीक
से
हम
को
ऐ
दोस्त
ऐब
लगते
हैं
ब-ज़ाहिर
प
हुनर
हैं
हम
लोग
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Abhishek shukla
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कल
मेरी
एक
प्यारी
सहेली
किताब
में
इक
ख़त
छुपा
रही
थी
कि
तुम
याद
आ
गए
Anjum Rehbar
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जब
से
तुमने
फेरी
हैं
अपनी
निगाहें,
इश्क़
में
की
बे-वफ़ाई
टूट
कर
दिल
की
तरह
टुकड़ों
में
मैं
भी
तो
यहाँ
बिखरा
पड़ा
हूँ
A R Sahil "Aleeg"
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तकलीफ़
होती
है
और
दर्द
भी
दिल
में
ये
झूठ
है
,मर्द
रोता
नहीं
दोस्त
A R Sahil "Aleeg"
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इश्क़
करता
जो
वफ़ा
होता
नहीं
कोई
मलाल
याद
में
पल
जो
गुज़ारूँ
भी
तो
घिन
आती
है
A R Sahil "Aleeg"
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बे-वफ़ाई
न
कोई
मजबूरी
मसअला
ये
तो
फ़ौक़ियत
का
है
A R Sahil "Aleeg"
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जिस
तरह
करने
से
कुछ
मुमकिन
हो
पाता
है
हाफ़िद
छोड़ना
है
जो
कुछ,
वो
भी
छोड़ने
से
ही
होगा
A R Sahil "Aleeg"
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