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A R Sahil "Aleeg"
tujhe badnaam karne ki niyat rakhta nahin tha main lekin
tujhe badnaam karne ki niyat rakhta nahin tha main lekin | तुझे बदनाम करने की नियत रखता नहीं था मैं ,लेकिन
- A R Sahil "Aleeg"
तुझे
बदनाम
करने
की
नियत
रखता
नहीं
था
मैं
,लेकिन
ये
मजबूरी
थी
मेरी,
बज्म
में
जो
नाम
बोला
है
तेरा
- A R Sahil "Aleeg"
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न
जाने
कब
से
इक
मतला
लिए
बैठा
हूँ
महफ़िल
में
तुम्हारा
ज़िक्र
कर
दे
कोई
तो
पूरी
ग़ज़ल
कर
लूँ
Harsh saxena
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पहले-पहल
तो
लड़
लिए
अल्लाह
से
मगर
अब
पेश
आ
रहे
हैं
बड़ी
आजिज़ी
से
हम
Amaan Pathan
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एक
महफ़िल
में
कई
महफ़िलें
होती
हैं
शरीक
जिस
को
भी
पास
से
देखोगे
अकेला
होगा
Nida Fazli
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मुझ
सेे
होकर
के
ही
बे-ज़ार
चले
जाते
हैं
मेरी
महफ़िल
से
मेरे
यार
चले
जाते
हैं
मुझको
मालूम
है
रहता
नहीं
है
अब
वो
वहाँँ
साल
में
फिर
भी
हम
इक
बार
चले
जाते
हैं
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Dipendra Singh 'Raaz'
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गले
मिली
कभी
उर्दू
जहाँ
पे
हिन्दी
से
मिरे
मिज़ाज
में
उस
अंजुमन
की
ख़ुशबू
है
Satish Shukla Raqeeb
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महफ़िल
में
तेरी
यूँँ
ही
रहे
जश्न-ए-चरागाँ
आँखों
में
ही
ये
रात
गुज़र
जाए
तो
अच्छा
Sahir Ludhianvi
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शोर
की
इस
भीड़
में
ख़ामोश
तन्हाई
सी
तुम
ज़िन्दगी
है
धूप
तो
मद-मस्त
पुर्वाई
सी
तुम
चाहे
महफ़िल
में
रहूँ
चाहे
अकेले
में
रहूँ
गूँजती
रहती
हो
मुझ
में
शोख़
शहनाई
सी
तुम
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Kunwar Bechain
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तुम
हुस्न
की
ख़ुद
इक
दुनिया
हो
शायद
ये
तुम्हें
मालूम
नहीं
महफ़िल
में
तुम्हारे
आने
से
हर
चीज़
पे
नूर
आ
जाता
है
Sahir Ludhianvi
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पहले
थोड़ी
मुश्किल
होगी
आगे
लेकिन
मंज़िल
होगी
सब
बाराती
शायर
होंगे
मेरी
शादी
महफ़िल
होगी
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Tanoj Dadhich
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हमीं
हैं
सोज़
हमीं
साज़
हैं
हमीं
नग़्मा
ज़रा
सँभल
के
सर-ए-बज़्म
छेड़ना
हम
को
Moin Ahsan Jazbi
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लाश
पड़ी
है
वफ़ा
और
जज़्बातों
की
दिल
भी
ख़ुश
है
इश्क़
में
कर्बल
हो
कर
A R Sahil "Aleeg"
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हया
ईमान
का
हिस्सा
है
साहब,
सोच
कर
देना
ये
दिल
थोड़ी
है
जो
बिन
सोचे
ही
दे
दें
किसी
को
भी
A R Sahil "Aleeg"
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यहाँ
जीना
भी
मुश्किल
है
यहाँ
मरना
भी
है
मुश्किल
फ़क़त
इतना
सा
ही
है
इश्क़
का
अंजाम
लिख
देना
A R Sahil "Aleeg"
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मुझे
तुम
अदना
सा
बिंदी
न
समझो
ये
मशवरा
है
मैं
जब
चाहूँ
संग
से
सग
बना
सकता
हूँ
जहाँ
में
A R Sahil "Aleeg"
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हर
इक
कोशिश
करने
वालों
की
क़िस्मत
में
जीत
होती
नहीं
साहब
शिकस्ता
लोगों
को
तो
दोस्त,
दुनिया
में
याद
कोई
नहीं
रखता
A R Sahil "Aleeg"
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