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A R Sahil "Aleeg"
ho gaii thii KHud se hi nafrat fuzoon-tar
ho gaii thii KHud se hi nafrat fuzoon-tar | हो गई थी ख़ुद से ही नफ़रत फ़ुज़ूँ-तर
- A R Sahil "Aleeg"
हो
गई
थी
ख़ुद
से
ही
नफ़रत
फ़ुज़ूँ-तर
कर
लिया
था
इसलिए
भी
इश्क़
मैंने
- A R Sahil "Aleeg"
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जीत
ले
दुनिया
को
बिन
हथियार
के
कृष्ण
की
बंसी
में
ऐसे
राग
हैं
Alankrat Srivastava
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तेरी
तारीफ़
करने
लग
गए
हैं
तेरे
दुश्मन
हमारे
शे'र
सुनके
Tanoj Dadhich
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तुम
सेे
जो
मिला
हूँ
तो
मेरा
हाल
है
बदला
पतझड़
में
भी
जैसे
के
कोई
फूल
खिला
हो
Haider Khan
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ज़िन्दगी,
यूँँ
भी
गुज़ारी
जा
रही
है
जैसे,
कोई
जंग
हारी
जा
रही
है
जिस
जगह
पहले
से
ज़ख़्मों
के
निशां
थे
फिर
वहीं
पे
चोट
मारी
जा
रही
है
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Azm Shakri
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सूरज
से
जंग
जीतने
निकले
थे
बेवक़ूफ़
सारे
सिपाही
मोम
के
थे
घुल
के
आ
गए
Rahat Indori
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इस
तरह
ज़िंदगी
ने
दिया
है
हमारा
साथ
जैसे
कोई
निबाह
रहा
हो
रक़ीब
से
Sahir Ludhianvi
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अगर
रक़ीब
न
होते
तो
दोस्त
होते
आप
हमारे
शौक़,
ख़यालात
एक
जैसे
हैं
Amulya Mishra
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मजबूरी
में
रक़ीब
ही
बनना
पड़ा
मुझे
महबूब
रहके
मेरी
जो
इज़्ज़त
नहीं
हुई
Sabahat Urooj
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कभी
कभी
तो
झगड़ने
का
जी
भी
चाहेगा
मगर
ये
जंग
मोहब्बत
से
जीती
जाएगी
Amaan Abbas Naqvi
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दश्त
छोड़े
हुए
अब
तो
अर्सा
हुआ
मैं
हूँ
मजनूँ
मगर
नाम
बदला
हुआ
मुझको
औरत
के
दुख
भी
पता
हैं
कि
मैं
एक
लड़का
हूँ
बेवा
का
पाला
हुआ
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Rishabh Sharma
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मेरी
ग़ज़लों
में
महकती
गुल-ए-नीलोफ़र
भी
है
अब
A R Sahil "Aleeg"
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यूँँ
भी
हैं
पाक-ज़ाद
सिगरेटें
दिल
को
करती
हैं
शाद
सिगरेटें
पहले
वो
उसके
बाद
सिगरेटें
अब
हैं
बाक़ी
मुराद
सिगरेटें
पहले
फुकता
है
इश्क़
में
इक
दिल
और
फिर
उसके
बाद
सिगरेटें
अब
ख़यालों
में
वो
नहीं
आता
सिर्फ़
रहती
हैं
याद
सिगरेटें
तर्क
-ए-
निस्बत
में
कुछ
नहीं
था
और
जो
भी
थी
सब
फ़साद
सिगरेटें
फूँकती
ही
नहीं
मेरे
दिल
को
हाए
ये
ना-मुराद
सिगरेटें
जब
भी
महफ़िल
में
बैठ
जाता
हूँ
मुझ
को
देती
हैं
दाद
सिगरेटें
तेरी
यादों
से
मेरी
हस्ती
को
देती
हैं
इम्तिदाद
सिगरेटें
ऐसे
आती
है
ये
लब-ए-साहिल
जैसे
हों
हूर-ज़ाद
सिगरेटें
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A R Sahil "Aleeg"
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सभी
मिलते
हैं
इक
दूजे
से
मज़हब
की
बिना
पर
ही
कोई
इंसाँ
को
इंसाँ
ही
समझ
कर
क्यूँ
नहीं
मिलता
A R Sahil "Aleeg"
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है
मुयस्सर
सब
को
मेरी
डायरी
जिस
को
लिखा
है
शा'इरी
में
गर
जो
चाहो
तुम
भी
पढ़
लो
ज़िंदगी
और
इश्क़
के
सब
ज़ाती
क़िस्से
A R Sahil "Aleeg"
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जिसे
देखो
यहाँ
सब
प्यार
करना
चाहता
है
नहीं
कोई
यहाँ
जो
चाहता
हो
इश्क़
करना
A R Sahil "Aleeg"
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