ujad chuki hai harik shaakh barg-o-baar nahin | उजड़ चुकी है हरिक शाख बर्ग-ओ-बार नहीं

  - A R Sahil "Aleeg"
उजड़चुकीहैहरिकशाखबर्ग-ओ-बारनहीं
बहारमेंभीहमारेलिएबहारनहीं
हरएकशख़्सख़ुदाकोसमझताहैअदना
ख़तापेअपनीकोईभीतोशर्म-सारनहीं
यक़ीनतुझकोनहींहैजोमेरीचाहतका
मुझेभीतेरीवफ़ाओंऐतबारनहीं
गुलोंनेपहनलियाहैफ़रेबकाचश्मा
बहारजिसकोसमझतेहैंवो,बहारनहीं
रहेवोदोस्तकिदुश्मन,हैसारेमौक़ा-परस्त
हमाराकोई,कहींभीतोग़म-गुसारनहीं
बिछड़केउससेेयेकहनेकीबातभरहैबस
उसेभीचैननहींहैमुझेक़रारनहीं
बतादेसाक़ीतुझेइंतिज़ारहैकिसका
मैंपीचुकाहूँ,यहाँऔरबादा-ख़्वारनहीं
मैंतेरीबातवाइज़यक़ीनकैसेकरूँँ?
यहाँकिसीकोख़ुदाकाभीऐतिबारनहीं
हमऐसेशख़्सकेपिंजरमेंक़ैदहैंसाहिल
हमारेवास्तेकोईरहे-फ़रारनहीं
  - A R Sahil "Aleeg"
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