तमाम शहर की अक्सर रहे नज़र में है

  - A R Sahil "Aleeg"
तमामशहरकीअक्सररहेनज़रमेंहै
वोएकशख़्सजोमेरेलहूजिगरमेंहै
ख़याल-ओ-ख़्वाबकीमंज़िलतलाशकरताफिरे
हरएकशख़्सयहाँउम्रभरसफ़रमेंहै
सनमनेपाईहैजलवागरीजोक्याबोलूँ
वोबातऔरवोरौनक़कहाँक़मरमेंहै
फ़रेबझूठरियाकारियाँकरेहैअब
जानेआजकाइंसानकिसअसरमेंहै
हुएहैंइश्क़मेंबदनामइतनेहम'साहिल'
हमारानामयहाँरोज़हीख़बरमेंहै
  - A R Sahil "Aleeg"
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