zara si baat pe aañsu bah | ज़रा सी बात पे आँसू बहाए जाते हैं

  - A R Sahil "Aleeg"
ज़रासीबातपेआँसूबहाएजातेहैं
हुज़ूरफ़ित्ना-ए-महशरउठाएजातेहैं
हवाकीओटमेंहमथरथराएजातेहैं
कुछइसतरहवोनिगाहोंमेंआएजातेहैं
हयाकापीरसमझतेहैंलोगतोउनको,
हमेंख़बरहैवोक्यागुलखिलाएजातेहैं
दिलोंमेंआगलगीहैजोवोनहींबुझती
बदनसेसिर्फ़हवसहीबुझाएजातेहैं
सियाहरातकेदामनमेंरोशनीकेलिए
चराग़हमभीलहूसेजलाएजातेहैं
मुझेयेडरहैकोईउँगलियाँकरदेक़लम
वोहाथसबसेेमुसलसलमिलाएजातेहैं
कहींकहींतोखुशामदभीनहींजाते
कहींकहींतोमियाँबिनबुलाएजातेहैं
ख़ुदाकरेकिसलामतरहेंमिरेदुश्मन
जोमेरीराहमेंकांटेबिछाएजातेहैं
वोमयक़दाहोहरमयासनमकादरवाज़ा
जिधरभीजाएकदमडगमगाएजातेहैं
तलाशऔरकरेंतीनकांधेसाहिल
वफ़ाकीलाशजोतन्हाउठाएजातेहैं
  - A R Sahil "Aleeg"
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