ishq ka bojh sar pe bhari hai | इश्क़ का बोझ सर पे भारी है

  - A R Sahil "Aleeg"
इश्क़काबोझसरपेभारीहै
फिरभीसाँसोंकारक़्सजारीहै
छीलदेताहैभरतेज़ख़्मोंको
ग़मकीभीख़ूबदस्तकारीहै
तेरीआँखोंकेइनचराग़ोंमें
रौशनीआजभीहमारीहै
जानेकिसकिसपेमेहरबाँहैवो
जानेकिसकिसकीदावेदारीहै
दोस्त-ओ-दुश्मनमेंफ़र्कहैग़ाइब
अबजिसेदेखिएशिकारीहै
इकइशारेपेनाचतेहैंसब
तूख़ुदाहैकिफिरमदारीहै
मौतसेसबकासामनाहोगा
इकइकदिनसभीकीबारीहै
क्याकहेंज़िंदगीकेबारेमें
यूँँसमझलोकिबसगुज़ारीहै
हैजो'साहिल'ग़ज़लकीसूरतये
इश्क़कामुझपेदेनदारीहै
  - A R Sahil "Aleeg"
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