hijr-o-gham kii khuraak hoti hai | हिज्र-ओ-ग़म की ख़ुराक होती है

  - A R Sahil "Aleeg"
हिज्र-ओ-ग़मकीख़ुराकहोतीहै
जोमोहब्बततपाकहोतीहै
इल्ममिलताहैइनकिताबोंसे
ज़ेहनियतताबनाकहोतीहै
मौतसेजबमिलातोयेजाना
ज़िंदगीदर्दनाकहोतीहै
अबजुनूँहैकोईपास-ए-वफ़ा
बातबसठीकठाकहोतीहै
इश्क़मेंचाहेकुछभीहोतामीर
आख़िरशख़ाकख़ाकहोतीहै
इश्क़मेंऔरकुछनहीं'साहिल'
आबरूचाक-चाकहोतीहै
  - A R Sahil "Aleeg"
Share

profile-whatsappprofile-twitterprofile-fbprofile-copy