hasrat-e-dil jo sanwaarūń bhi to ghin aati hai | हसरत-ए-दिल जो सँवारूँ भी तो घिन आती है

  - A R Sahil "Aleeg"
हसरत-ए-दिलजोसँवारूँभीतोघिनआतीहै
अबकोईहुस्ननिहारूँभीतोघिनआतीहै
अबतेरीओरउठेआँखेंयेहैबादकीबात
अबतेरानामपुकारूँभीतोघिनआतीहै
इश्क़करताजोवफ़ाहोतानहींकोईमलाल
यादमेंपलजोगुज़ारूँभीतोघिनआतीहै
इश्क़कीबाज़ीभलाबे-वफ़ासेक्यूँजीतूँ
ख़ुदकोख़ुदसेहीजोहारूँभीतोघिनआतीहै
एकवोदौरथातन्हाईभीथीमेलोंसी
ख़ुदकोअबइससेेगुज़ारूँभीतोघिनआतीहै
दिलभीबच्चेकीतरहरोज़हीजाताहैमचल
हसरतेंइसकीजोमारूँभीतोघिनआतीहै
मुझपेइसइश्क़केकुछऐसेभीहैंएहसानात
उसपेमैंजानकोवारूँभीतोघिनआतीहै
रौशनाईनेदुखाईहैयूँँआँखें'साहिल'
दुखकोकाग़ज़पेउतारूँभीतोघिनआतीहै
  - A R Sahil "Aleeg"
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