वो लिखता जब ग़ज़ल है तो परी की बात करता है

  - Arman Habib
वोलिखताजबग़ज़लहैतोपरीकीबातकरताहै
वोहरमिसरेमेंफिरउसकीख़ुशीकीबातकरताहै
हवामेंघुलगईख़ुशबूफ़िज़ानेजबछुआउसको
चमनसेफूलअबउसकीगलीकीबातकरताहै
गुलोंमेंरंगख़ुशबूमेंअसरउसकानज़रआए
हरइकझोंकाहरइकसायाउसीकीबातकरताहै
सितारेउसकेजलवोंकाजहाँक़िस्सासुनातेहैं
फ़लकभीबा-अदबदिलकीलगीकीबातकरताहै
जिसेबेचैनकरताथातसव्वुररातभरउसका
वहीयेचाँदअबउसकीहँसीकीबातकरताहै
किसीदरियामेंहैलगतावोबिंत-उल-बहरकोदेखा
वोहरशेर-ओ-सुख़नमेंहीनदीकीबातकरताहै
क़दमउसजल-परीकेहैंपड़े'अरमान'साहिलपर
समुंदरभीतोमौजोंसेउसीकीबातकरताहै
  - Arman Habib
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