meraa gunaah | “मेरा गुनाह”

  - arjun chamoli
“मेरागुनाह”
तूफ़ाननेभीमुझकोहीइल्ज़ामदिया
कमज़ोरदरख़्तथाइसलिएगिरगया
अभीतोमैंपूरासूखाभीनहींथा
किलोगोंनेशाख़ोंकोकाटलिया
जिन्हेंराहमेंमैंनेछायादीऔरफलदिए
बारिशसेबचायाऔरभीगनेनहींदिया
वोघरउठालेगएमुझेअर्थीकीतरह
उन्होंनेभीमुझपरकोईतरसनहींकिया
शामकोअँगीठीमेंठूँसाऔरआगदिखाई
ख़ुदकोठंडसेबचानेकोमुझेजलादिया
फिरभीउनकीनज़रोंमेंमैंनेगुनाहकिया
किगिरनेकेबादकोईफलनहींदिया
  - arjun chamoli
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