sabr ka fal ab na meetha ilm mujhko de gaya | सब्र का फल अब न मीठा इल्म मुझको दे गया

  - arjun chamoli
सब्रकाफलअबमीठाइल्ममुझकोदेगया
मैंजड़ोंकोसींचताथावोगुलोंकोलेगया
चारदिनकीचाँदनीहैफिरअँधेरीरातहै
आजमैंख़ुशथाबड़ाउपदेशमुझकोदेगया
आसमाँसेगिररहाथाइकसिताराटूटकर
मैंनिहारूॅंआसमाँकोवोदु'आतकलेगया
ज़ख़्मपेछिड़केनमकवोज़ख़्मताज़ाजबदिखे
ज़ख़्मसूखाजबदिखातोऔरचोटेंदेगया
दूधकेभीदाँतटूटेअबतलकउसकेनहीं
वोबनाहैराजनेताबापबसकहकेगया
साँपछातीपरथेलोटेकामयाबीदेखकर
जोउठाहैवोगिरेगामुझकोभाषणदेगया
मैंसमाजाताज़मींपरजबभीकीग़लतीकभी
वोग़ज़लमेरीचुराछातीफुलाकरकेगया
दालहोतीघरकीमुर्गीयेबताऊँमैंकिसे
रोज़ख़ुदवोघरकीबीवीछोड़कोठेपेगया
अंतहोगाजोभलातोसबभलाहोतानहीं
जीतकरअर्जुनमहाभारतदुखीमनसेगया
  - arjun chamoli
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