log khud ko kyuuñ sanwaara karte hain | लोग ख़ुद को क्यूँ सँवारा करते हैं

  - arjun chamoli
लोगख़ुदकोक्यूँसँवाराकरतेहैं
आहभरकेलोगउनपेमरतेहैं
येनज़ररुख़सेहटाऍंकिसतरह
परनज़ररुख़परपड़ेतोडरतेहैं
दर्दबढ़जाताहैनज़दीकीसेऔर
दूरसेहीउनकोसज्दाकरतेहैं
फूलसहसाहाथनेथाछूलिया
तबसेजानाफूलपिघलाकरतेहैं
फिरकहींजन्नत-निगाहेंफेरले
हमफ़राग़-ए-दिलयेसदक़ाकरतेहैं
  - arjun chamoli
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