KHat likha tha khwaab men aur khwaab men ja kar diya | ख़त लिखा था ख़्वाब में और ख़्वाब में जा कर दिया

  - arjun chamoli
ख़तलिखाथाख़्वाबमेंऔरख़्वाबमेंजाकरदिया
जबसमझीप्यारकोतोप्यारसमझाकरदिया
प्यारकाथादर्दख़तमेंदर्दकोजानेनहीं
प्यारसेचाहाथाउत्तरहाथझटकाकरदिया
हमकिएसज्दाउसीकासरक़दमपररखदिए
पाँवखींचेउसनेपीछेप्याररुसवाकरदिया
सहमकरहमनेउठायासरउसीकीधूलसे
औरपूछाक्याख़ताहैख़ुदकोसदक़ाकरदिया
जाँहमारीअबतुम्हारीक़त्लकरदोहाथसे
हमकहेंगेहाथछूकरतुमनेअपनाकरदिया
  - arjun chamoli
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