हरगामचाहतोंमेंगिरहहैख़यालपर
क्यूँँजीरहेहैंख़्वाब-ए-हवसकीमिसालपर
ज़ेहनोंमेंबुनरहेहैंख़यालातकागुमाँ
सचबोलतेनहींकोईसचकेसवालपर
आकरवुजूदबेचदियाइकमक़ामपर
अबढूँढतेहैंअज़्म-ए-ख़ुदीकोमआलपर
ज़ंजीर-ए-आरज़ूकोहीबसज़ीस्तमानकर
आज़ादियाँभुलाकेपड़ेकिसबवालपर
क़ब्रोंपेताजरखतेहैंदुनियामेंलोगअब
परसाथ-साथआँखहैमुर्देकेमालपर
दौलतकीगर्ददेखकेरिश्तेबनेतोक्या
तन्हाहीलौटतेहैंसभीइंतिक़ालपर