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Anurag Singh Parihar 'Sifar'
is se pahle zakhm dilon ke bhar jaayen
is se pahle zakhm dilon ke bhar jaayen | इस से पहले ज़ख़्म दिलों के भर जाएँ
- Anurag Singh Parihar 'Sifar'
इस
से
पहले
ज़ख़्म
दिलों
के
भर
जाएँ
ऐसा
नइँ
हो
यार
कहीं
हम
मर
जाएँ
वो
ख़ुश
हैं
जिनकी
ख़ुद्दारी
सस्ती
है
जिन
पर
हो
दस्तार
कहाँ
वो
सर
जाएँ
- Anurag Singh Parihar 'Sifar'
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दुख
तो
बहुत
मिले
हैं
मोहब्बत
नहीं
मिली
यानी
कि
जिस्म
मिल
गया
औरत
नहीं
मिली
मुझको
पिता
की
आँख
के
आँसू
तो
मिल
गए
मुझको
पिता
से
ज़ब्त
की
आदत
नहीं
मिली
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Abhishar Geeta Shukla
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किस
ने
हमारे
शहर
पे
मारी
है
रौशनी
हर
इक
मकाँ
के
ज़ख़्म
से
जारी
है
रौशनी
Nomaan Shauque
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तेरी
आँखों
में
जो
इक
क़तरा
छुपा
है,
मैं
हूँ
जिसने
छुप
छुप
के
तेरा
दर्द
सहा
है,
मैं
हूँ
एक
पत्थर
कि
जिसे
आँच
न
आई,
तू
है
एक
आईना
कि
जो
टूट
चुका
है,
मैं
हूँ
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Fauziya Rabab
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ज़िन्दगी
पर
लिख
दिया
था
नाम
मैंने
राम
का
और
फिर
दुख
के
समुंदर
पार
सारे
हो
गए
Tanoj Dadhich
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वो
सर
भी
काट
देता
तो
होता
न
कुछ
मलाल
अफ़्सोस
ये
है
उस
ने
मेरी
बात
काट
दी
Tahir Faraz
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पास
जब
तक
वो
रहे
दर्द
थमा
रहता
है
फैलता
जाता
है
फिर
आँख
के
काजल
की
तरह
Parveen Shakir
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दिल
हिज्र
के
दर्द
से
बोझल
है
अब
आन
मिलो
तो
बेहतर
हो
इस
बात
से
हम
को
क्या
मतलब
ये
कैसे
हो
ये
क्यूँँकर
हो
Ibn E Insha
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जो
कहता
है
वैसे
करना
पड़ता
है
इतना
प्यारा
है
कि
डरना
पड़ता
है
आँखें
काली
कर
देता
है
उसका
दुख
सबको
ये
जुर्माना
भरना
पड़ता
है
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Kafeel Rana
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हमारे
सैकड़ों
दुख
थे,
और
उस
में
एक
दुख
ये
भी
जो
हम
से
हो
के
गुज़रे
थे,
हमें
दीवार
कहते
थे
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Siddharth Saaz
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ज़ख़्म
दिल
के
भरे
नहीं
अब
तक
और
इक
दर्द
फिर
हरा
कर
लूँ
अब
भरोसा
नहीं
किसी
का
पर
तू
कहे
तो
यक़ीं
तिरा
कर
लूँ
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Harsh saxena
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तेरी
आँखों
के
सागर
में
किनारे
भूल
जाता
हूँ
तेरे
आगे
जहाँ
के
सब
नज़ारे
भूल
जाता
हूँ
तू
जैसे
चाँद
धरती
पर
हो
उतरा
आसमानों
से
फ़क़त
तू
याद
रहता
है
सितारे
भूल
जाता
हूँ
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Anurag Singh Parihar 'Sifar'
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लबों
पर
तिश्नगी
चाहत
की
जावेदानी
होने
तक
रहा
ठहरा,
अना
सागर
कि
पानी
पानी
होने
तक
Anurag Singh Parihar 'Sifar'
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