अश्क यही बता रहे दर्द बढ़ा ही जा रहा

  - Anuj kumar
अश्कयहीबतारहेदर्दबढ़ाहीजारहा
रातकभीढलेगीहीख़ुदकोयक़ींदिलारहा
कितनेदिनोंकेबादवोयारमिलीहैआजजो
वोमुझेदेखतीरहीमैंउसेदेखतारहा
आँखमिलीहैउससेेजोरूहनिकलगईतभी
यादनहींकिक्याहुआजिस्मवहींखड़ारहा
उसनेवफ़ाकेनामपरमुझसेेजफ़ाकरीहैबस
अपनाख़ुदाजिसेकभीइश्क़मेंमानतारहा
दिलमेंख़यालहैंबहुतमनमेंसवालहैंबहुत
कोईजवाबहीनहींइनकाकहींमैंपारहा
शख़्सचलागयाजोदूरआँखकामेरीथावोनूर
यादमेंख़्वाबमेंउसेबादमैंढूँढतारहा
आजकिसीकेसाथमेंहाथमिलाएहाथमें
शख़्सवहीहैजोकभीपहले-पहलमिरारहा
खेलबहुतयेइश्क़काअबचलेगाज़िन्दगी
वोभीमुझेभुलाचुकीमैंभीउसेभुलारहा
ग़लतीनहींहैयेतेरीहिज्र-ए-नसीबहीहूँमैं
क़र्ज़बहुतहीपहलेसेक़िस्तोंमेंयेचुकारहा
टूटगयाहैदिलअनुजफिरकिसीबेज़बानका
घाटनदीकेबैठवोगीतविरहकेगारहा
  - Anuj kumar
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