har ek lafz men seene ka noor dhaal ke rakh | हर एक लफ़्ज़ में सीने का नूर ढाल के रख

  - Anjum Barabankvi
हरएकलफ़्ज़मेंसीनेकानूरढालकेरख
कभी-कभारतोकाग़ज़पेदिलनिकालकेरख
जोदोस्तोंकीमोहब्बतसेजीनहींभरता
तोआस्तीनमेंदो-चारसाँपपालकेरख
तुझेतोकितनीबहारेंसलामभेजेंगी
अभीयेफूलसाचेहराज़रासँभालकेरख
यहाँसेधूपकेनेज़ेबुलंदहोतेहैं
तमामछाँवकेक़िस्सोंपेख़ाकडालकेरख
महकरहेहैंकईआसमानमिट्टीमें
क़दमज़मीन-ए-मोहब्बतपेदेख-भालकेरख
दिल-ओ-दिमाग़ठिकानेपेआनेवालेहैं
अबउसकाज़िक्रकिसीऔरदिनपेटालकेरख
  - Anjum Barabankvi
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