जब हमारी धड़कनें बढ़ने लगें तो है बसंत

  - Anita Choudhary
जबहमारीधड़कनेंबढ़नेलगेंतोहैबसंत
मुस्कुराकरबाग़ोंमेंकलियाँखिलेंतोहैबसंत
दूबपत्तेशबनमीसेमोतियोंसेपुर-निहाँ
नभसेकिरणेंकेधरतीकोछुएँतोहैबसंत
फूलोंकेआग़ोशमेंजाएँभौरेख़ुद-ब-ख़ुद
रोज़फिरगुंजारकरमौजेंकरेंतोहैबसंत
झाँकनेपल्लवलगेंजबपेड़ोंकीहरशाख़से
ख़ुशपरिंदोंकीवहाँचहकनसुनेंतोहैबसंत
आमकेकुंजोंमेंबैठीप्रेममेंडूबीहुईं
कोयलोंकेखनखनातेसुरसजेंतोहैबसंत
झीलकीलहरेंमचलतीपाशमेंलेनेजिन्हें
फूलकमलोंकेवहाँपेजबखिलेंतोहैबसंत
जबख़िज़ाँकादौरबीतेतब'अनिल'होपुर-सुकूँ
प्रेमकेबिछड़ेवोपंछीजबमिलेंतोहैबसंत
  - Anita Choudhary
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