ik shikaayat roz rahtii hai mujhe | इक शिकायत रोज़ रहती है मुझे

  - Aniket sagar
इकशिकायतरोज़रहतीहैमुझे
औरदिलमेंरोज़ख़लतीहैमुझे
बापआँसूक्यूँदिखाताहैनहीं
बात'ना'हीयेसमझतीहैमुझे
रहसकोगीक्यासनममेरेसिवा
हरघड़ीजोकॉलकरतीहैमुझे
मुस्कुराकरदिलचुरातीवोमेरा
फिरगलेसेरोज़लगतीहैमुझे
काश!मेरीज़िन्दगीखुशहालहो
सुनकेअक्सरमौतहँसतीहैमुझे
वोरक़ीबोंसेहमेशामिलतीहै
औरआकरजानकहतीहैमुझे
शौक़सेकरताहूँसागरशा'इरी
बसअतामेंरोज़मिलतीहैमुझे
  - Aniket sagar
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