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Aniket sagar
haath se mehnat kare mazdoor hai
haath se mehnat kare mazdoor hai | हाथ से मेहनत करे मज़दूर है
- Aniket sagar
हाथ
से
मेहनत
करे
मज़दूर
है
कौन
कहता
हैं
कि
वो
मजबूर
है
चाय
की
टपरी
पे
बच्चा
तो
वही
नाम
छोटू
से
बड़ा
मशहूर
है
शौक़
से
करता
नहीं
मैं
नौकरी
घर
चलाने
का
यहीं
दस्तूर
है
सिलसिला
ग़म
का
चलेगा
उम्रभर
वो
ख़ुशी
का
दौर
काफ़ी
दूर
है
दिल
ज़ियादा
प्यार
में
पड़ता
नहीं
वो
उसी
के
दर्द
में
मख्मूर
है
शा'इरी
में
बोलता
सागर
तभी
शा'इरी
में
आज
उसका
नूर
है
- Aniket sagar
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सिगरेट
की
शक्ल
में
कभी
चाय
की
शक्ल
में
इक
प्यास
है
कि
जिसको
पिए
जा
रहे
हैं
हम
Ameer Imam
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आज
उसके
गाल
चू
में
हैं
तो
अंदाज़ा
हुआ
चाय
अच्छी
है
मगर
थोड़ा
सा
मीठा
तेज़
है
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Tehzeeb Hafi
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उदासी
चल
कहीं
चलते
हैं
दोनों
पिएँगे
चाय
और
बातें
करेंगे
Gaurav Singh
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ठंडी
चाय
की
प्याली
पी
के
रात
की
प्यास
बुझाई
है
Rais Farog
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नाज़-ओ-नख़रे
क्या
उठाए,
क्या
सुने
उस
के
गिले
देखते
ही
देखते
लड़की
घमंडी
हो
गई
देखते
रहने
में
उस
को
और
क्या
होता,
मगर
जो
थी
जान-ए-आरज़ू,
वो
चाय
ठंडी
हो
गई
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Kazim Rizvi
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इतनी
दिलकश
थी
गुफ़्तगू
उसकी
चाय
का
कप
भी
सुन
रहा
था
उसे
Hashim Raza Jalalpuri
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अब
ये
क्या
बात
हुई
गाल
को
चूमूँ
लब
नइँ
यानी
हम
चाय
पिए
वो
भी
बिना
चीनी
के
Neeraj Neer
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सिगरटें
चाय
धुआँ
रात
गए
तक
बहसें
और
कोई
फूल
सा
आँचल
कहीं
नम
होता
है
Wali Aasi
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चाय
के
बारे
में
कोई
राय
मत
दो
यार
मुझको
बात
समझो
इश्क़
सब
सेे
पूछकर
होता
नहीं
है
Neeraj Neer
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बस
एक
रस्म-ए-तअल्लुक़
निभाने
बैठे
हैं
वगरना
दोनों
के
कप
में
ज़रा
भी
चाय
नहीं
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सिर्फ़
मेरा
मन
नहीं
ये
आसमाँ
भी
रो
पड़ा
था
बेहया
जैसे
मुझे
तू
छोड़
कर
जब
जा
रही
थी
Aniket sagar
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मुझे
क्यूँ
याद
कर-कर
के
बड़ी
बेचैन
होती
है
कभी
तू
आहें
भर-भर
के
बड़ी
बेचैन
होती
है
मोहब्बत
है
तुझे
मुझ
सेे
अगर
इज़हार
कर
दिलबर
ज़माने
से
यूँँ
डर-डर
के
बड़ी
बेचैन
होती
है
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Aniket sagar
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मेरी
संतान
से
मेरा
अलग
दुर्लभ
ही
नाता
है
उसे
इक
मैं
मुझे
इक
वो
हमेशा
से
ही
भाता
है
लिखूंँ
तो
काव्य
उसका
नाम
गाऊंँ
तो
तराना
है
वो
मुझ
सेे
ही
मुझे
हर
रोज़
आकर
के
मिलाता
है
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Aniket sagar
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दिए
थे
कभी
ग़म
जिन्होंने
मुसलसल
मुझे
आग
बनकर
बरसना
है
उन
पर
Aniket sagar
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मुझे
झूठी
मोहब्बत
में
फँसाकर
रक़ीबों
से
मिलाए
जा
रहा
है
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