gham ke baadal phir bhi chhaaye rah ga.e | ग़म के बादल फिर भी छाए रह गए

  - Anand Narayan Mulla
ग़मकेबादलफिरभीछाएरहगए
आँखसेदरियाकेदरियाबहगए
ख़ौफ़-ए-उक़्बाऔरइसदुनियाकेबा'द
वोभीसहलेंगेजोयेग़मसहगए
किसनेदेखाहैजमाल-ए-रू-ए-दोस्त
सबनक़ाबोंमेंउलझकररहगए
मुख़्तसरथीदास्तान-ए-अर्ज़-ए-शौक़
बुझकेकुछतारेमिज़ापररहगए
ज़ीस्तहैइकशामअफ़्सानेकानाम
अपनीअपनीदास्ताँसबकहगए
तबकहींजाकरमिलीसत्ह-ए-सुकूँ
डूबकरजबग़ममेंतह-दर-तहगए
वारकरकेज़ीस्तभागीऔरहम
आस्तींअपनीचढ़ातेरहगए
चंदशैताँबंदकरकेख़ुशहैंयूँँ
जैसेबाहरसबफ़रिश्तेरहगए
अश्कबनपाएग़मकेतर्जुमाँ
येनुमाइशहीमेंअपनीरहगए
ज़िंदगीसेलड़पायाजोश-ए-दिल
परबहुततोलेमगररहरहगए
अश्कथेजबतकफ़रोज़ाँग़मथा
अबअँधेरेमेंअकेलेरहगए
जेबेंसबयारोंनेभरलींबज़्ममें
एक'मुल्ला'थेजोयूँँहीरहगए
  - Anand Narayan Mulla
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