ranj-o-gham laakh hon muskuraate raho | रंज-ओ-ग़म लाख हों मुस्कुराते रहो

  - Amjad Husain Hafiz Karnataki
रंज-ओ-ग़मलाखहोंमुस्कुरातेरहो
दोस्तदुश्मनसेमिलतेमिलातेरहो
येअँधेरेहैंमेहमानइकरातके
तुममगरसुब्हतकजगमगातेरहो
मैंभुलानेकीकोशिशकरूँँगातुम्हें
तुममुझेरोज़-ओ-शबयादआतेरहो
राहकेपेच-ओ-ख़मख़ुदसुलझजाएँगे
सू-ए-मंज़िलक़दमकोबढ़ातेरहो
अब्रबनकरबरसतेरहोहरतरफ़
उम्रशादाबियोंकीबढ़ातेरहो
मौतआएतोख़ामोशकरजाएगी
ज़िंदगीगीतहैइसकोगातेरहो
ताज़ादममुझकोरखनाहै'हाफ़िज़'तोफिर
हरक़दमपरमुझेआज़मातेरहो
  - Amjad Husain Hafiz Karnataki
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