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Daqiiq Jabaali
main kaise maan loo yaara tumhein bhi pyaar hai mujhse
main kaise maan loo yaara tumhein bhi pyaar hai mujhse | मैं कैसे मान लू यारा तुम्हें भी प्यार है मुझ सेे
- Daqiiq Jabaali
मैं
कैसे
मान
लू
यारा
तुम्हें
भी
प्यार
है
मुझ
सेे
तुम्हारा
और
मेरा
तो
कभी
झगड़ा
नहीं
होता
- Daqiiq Jabaali
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बात
की
फिर
बाद
में
झगड़ा
हुआ
और
उस
के
बाद
मन
हल्का
हुआ
Meem Alif Shaz
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नया
इक
रिश्ता
पैदा
क्यूँँ
करें
हम
?
बिछड़ना
है
तो
झगड़ा
क्यूँँ
करें
हम?
Jaun Elia
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अब
तो
मिलिए
बस
लड़ाई
हो
चुकी
अब
तो
चलिए
प्यार
की
बातें
करें
Akhtar Shirani
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ये
भी
तो
जब्र-ए-वक़्त
है
तू
मुझे
याद
भी
नहीं
जैसे
सँभल
गए
हो
तुम
वैसे
सँभल
गया
हूँ
मैं
Noon Meem Danish
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मुझे
पसंद
नहीं
ऐसे
कारोबार
में
हूँ
ये
जब्र
है
कि
मैं
ख़ुद
अपने
इख़्तियार
में
हूँ
Adil Mansuri
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अंदर-अंदर
ख़ुश
हैं
दोनों
पहला-पहला
झगड़ा
कर
के
Shariq Kaifi
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जीत
भी
लूँ
गर
लड़ाई
तुम
से
मैं
तो
क्या
मिलेगा
हाथ
में
दोनों
के
बस
इक
टूटा
सा
रिश्ता
मिलेगा
कर
के
लाखों
कोशिशें
गर
जो
बचा
भी
लूँ
मैं
रिश्ता
तो
नहीं
फिर
मन
हमारा
पहले
के
जैसा
मिलेगा
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Ankit Maurya
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उस
से
कहना
था
के
वो
कितना
ज़रूरी
है
मुझे
आ
रहा
हूँ
अभी
जिस
शख़्स
से
झगड़ा
करके
Khan Janbaz
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बैठ
कर
बात
की
और
जुदा
हो
गए
कोई
शिकवा
नहीं
कोई
झगड़ा
नहीं
Shariq Kaifi
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वो
लड़
कर
भी
सो
जाए
तो
उस
का
माथा
चूमूँ
मैं
उस
से
मोहब्बत
एक
तरफ़
है
उस
से
झगड़ा
एक
तरफ़
Varun Anand
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तेरी
तरह
वो
सीधी
हो
वो
सच्ची
हो
मैं
चाहता
हूँ
मेरी
भी
इक
बेटी
हो
Daqiiq Jabaali
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तुम
कभी
कितना
ज़ियादा
ध्यान
रखते
थे
हमारा
तुमको
ही
फ़ुर्सत
नहीं
अब
हाल
तक
को
पूछने
की
Daqiiq Jabaali
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हँसते
नइँ
खुलके
रोते
नइँ
खुलके
दोस्त
पत्थर
के
बन
गए
हम
लोग
Daqiiq Jabaali
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ये
शफ़क़
शाम
ढल
रही
होगी
और
वो
छत
पर
टहल
रही
होगी
लग
गई
होगी
चोट
पैरों
में
रेत
पर
फिर
उछल
रही
होगी
आज
फिर
घूरा
होगा
लड़कों
ने
सायकिल
में
टहल
रही
होगी
कर
रही
होगी
याद
फिर
मुझको
शम'अ
बनकर
वो
जल
रही
होगी
सब
लफ़ंगे
उसे
ही
छेड़ेंगे
जब
गली
से
निकल
रही
होगी
ग़लती
करके
छिपा
रही
होगी
तिफ़्ल
जैसे
मचल
रही
होगी
नींद
आती
न
होगी
रातों
को
करवटें
ही
बदल
रही
होगी
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Daqiiq Jabaali
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तेरी
यादों
का
क्या
है
रोज़
आना
और
जाना
है
मुझे
यादों
से
तेरी
अपनी
महफ़िल
को
सजाना
है
Daqiiq Jabaali
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