aap ki nazar-e-inaayat ho gaii | आप की नज़र-ए-इनायत हो गई

  - Amir Mausavi
आपकीनज़र-ए-इनायतहोगई
ज़िंदगीमरहून-ए-मिन्नतहोगई
मिलगएदोदिलमोहब्बतहोगई
बातबसइतनीक़यामतहोगई
क्यूँफ़ुज़ूँ-तरआजवहशतहोगई
क्याकिसीमंज़िलसेक़ुर्बतहोगई
आपहमपरमुल्तफ़ितक्याहोगए
हमसेदुनियाकोअदावतहोगई
होगएक्याक्याफ़सानेसर-बुलंद
सर-निगूँसारीहक़ीक़तहोगई
आपनेग़मदेदियाक्याकमदिया
चारदिनजीनेकीसूरतहोगई
नामउनकाजबज़बाँपरगया
यूँँभीगोयाइकइबादतहोगई
होगईजबभीजहालतमुक़्तदिर
दर-ब-दर'आमिर'फ़रासतहोगई
  - Amir Mausavi
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