kah bhi doon haal-e-dil agar shaayad | कह भी दूँ हाल-ए-दिल अगर शायद

  - Ameeta Parsuram Meeta
कहभीदूँहाल-ए-दिलअगरशायद
उनपेहोजाएकुछअसरशायद
अबज़मानाहैबे-वफ़ाईका
सीखलेंहमभीयेहुनरशायद
बा'दमुद्दतकेयेख़यालआया
रासआयानहींसफ़रशायद
हमहीअबतकसमझनहींपाए
कुछतोकहतीहैवोनज़रशायद
वैसेतोफ़ासलानहींकोई
कश्मकशहैअगरमगरशायद
हरनज़ारेमेंउसकाहीजल्वा
तुमकोआतानहींनज़रशायद
अजनबीअजनबीसेचेहरेहैं
येनहींहैमिरानगरशायद
नींदतारीहैआसमानोंपर
यादु'आमेंनहींअसरशायद
अबकोईआरज़ूनहींबाक़ी
ख़त्महोताहैयेसफ़रशायद
मौज-दर-मौजएकनश्शाथा
अबवोदरियागयाउतरशायद
ज़िंदगीअबतुझेसँवारेक्या
कोशिशेंसारीबे-असरशायद
इकजहाँअजनबीरहा'मीता'
इकजहाँमुझसेबा-ख़बरशायद
  - Ameeta Parsuram Meeta
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