nadi ke paar ujaala dikhaai deta hai | नदी के पार उजाला दिखाई देता है

  - Ameer Qazalbash
नदीकेपारउजालादिखाईदेताहै
मुझेयेख़्वाबहमेशादिखाईदेताहै
बरसरहीहैंअक़ीदतकीबदलियाँलेकिन
शुऊरआजप्यासादिखाईदेताहै
चराग़-ए-मंज़िल-ए-फ़र्दाजलाएगाइकरोज़
वोराहगीरजोतन्हादिखाईदेताहै
तिरीनिगाहनेहल्कासानक़्शछोड़ाथा
मगरयेज़ख़्मतोगहरादिखाईदेताहै
किसीख़यालकीमिश्अलकिसीसदाकाचराग़
हरएकसम्तअँधेरादिखाईदेताहै
'अमीर'पूछरहाहूँग़म-ए-ज़मानासे
हमारेघरमेंतुझेक्यादिखाईदेताहै
  - Ameer Qazalbash
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