ek takleef pas-e-qalb-o-jigar hoti hai | एक तकलीफ़ पस-ए-क़ल्ब-ओ-जिगर होती है

  - Ameer Hamza Salfi
एकतकलीफ़पस-ए-क़ल्ब-ओ-जिगरहोतीहै
अक्सरइसतरहसेभीरातबसरहोतीहै
मैंग़म-ए-शबकोबसरकरताहूँमुश्किलसेमियाँ
शबगुज़रतेहीकिसीदुखसेसहरहोतीहै
नासेहाकुछतोकमीहोगीतिरीबातमेंभी
इसलिएतेरीनसीहतबे-असरहोतीहै
देतोसकताहूँजवाबनमैंतुझेभीगाली
मेरेकिरदारकीतौहीनमगरहोतीहै
सिलसिलाहैयेमोहब्बतभीमुकाफ़ातहीका
जोइधरहोतीहैहालतवोउधरहोतीहै
आतेहैंकितनेहीदुश्वारमराहिल'हमज़ा'
तयजोकीजाएतोतयराहगुज़रहोतीहै
  - Ameer Hamza Salfi
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