ग़म-ए-उल्फ़तमेंडूबेथेउभरनाभीज़रूरीथा
हमेंराह-ए-मोहब्बतसेगुज़रनाभीज़रूरीथा
हक़ीक़तसामनेआईबहुतहैरतहुईमुझको
तिरेचेहरेसेपर्देकाउतरनाभीज़रूरीथा
हमेंमंज़िलकोपानाथातभीतोराह-ए-हस्तीमें
हमेंपथरीलेरस्तोंसेगुज़रनाभीज़रूरीथा
लुटातेहीरहेजोकुछभीअपनेपासथायारो
किख़ुशबूकीतरहअपनाबिखरनाभीज़रूरीथा
हमेंवोभूलबैठेहैंउन्हेंफिरयादक्याकरना
उन्हेंराह-ए-मोहब्बतमेंबिसरनाभीज़रूरीथा
हमारीज़िंदगीमेंहादसेहोतेरहे'अंबर'
उन्हेंसहतेहुएअपनानिखरनाभीज़रूरीथा