aaghosh men jo jalvaagar ik naazneen hua | आग़ोश में जो जल्वागर इक नाज़नीं हुआ

  - Amanat Lakhnavi
आग़ोशमेंजोजल्वागरइकनाज़नींहुआ
अंगुश्तरीबनामिरातनवोनगींहुआ
रौनक़-फ़ज़ालहदपेजोवोमह-जबींहुआ
गुम्बदहमारीक़ब्रकाचर्ख़-ए-बरींहुआ
कंदाजहाँमेंकोईऐसानगींहुआ
जैसाकितेरानाममिरेदिल-नशींहुआ
रौशनहुआयेमुझपेकिफ़ानूसमेंहैशम्अ
हाथउसकाजल्वागरजोतह-ए-आस्तींहुआ
रखताहैख़ाकपरवोक़दमजबकिनाज़से
कहताहैआसमानक्यूँँमैंज़मींहुआ
रौशनशबाबमेंजोहुईशम-ए-रू-ए-यार
दूद-ए-चराग़हुस्न-ए-ख़त-ए-अम्बरींहुआ
यारबगिराअदूपे'अमानत'केतूवोबर्क़
दोटुकड़ेजिससेशहपर-ए-रूहुल-अमींहुआ
  - Amanat Lakhnavi
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