koi mehram nahin milta jahaan men | कोई महरम नहीं मिलता जहाँ में

  - Altaf Hussain Hali
कोईमहरमनहींमिलताजहाँमें
मुझेकहनाहैकुछअपनीज़बाँमें
क़फ़समेंजीनहींलगताकिसीतरह
लगादोआगकोईआशियाँमें
कोईदिनबुल-हवसभीशादहोलें
धराक्याहैइशारात-ए-निहाँमें
कहींअंजामपहुँचावफ़ाका
घुलाजाताहूँअबकेइम्तिहाँमें
नयाहैलीजिएजबनामउसका
बहुतवुसअ'तहैमेरीदास्ताँमें
दिल-ए-पुर-दर्दसेकुछकामलूँगा
अगरफ़ुर्सतमिलीमुझकोजहाँमें
बहुतजीख़ुशहुआ'हाली'सेमिलकर
अभीकुछलोगबाक़ीहैंजहाँमें
  - Altaf Hussain Hali
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