sham'a ki tarah pighalte rahiye | शम्अ' की तरह पिघलते रहिए

  - Alqama Shibli
शम्अ'कीतरहपिघलतेरहिए
अपनीहीआगमेंजलतेरहिए
आजइंसाँकामुक़द्दरहैयही
हरनएसाँचेमेंढलतेरहिए
ज़िंदारहनेकीतमन्नाहैअगर
अपनाचेहराभीबदलतेरहिए
छाँवकीतरहबढ़ाभीकीजे
धूपकीतरहढलतेरहिए
ज़िंदगीकीहैअलामतलग़्ज़िश
क्यूँँबहर-गामसँभलतेरहिए
कामलीजेज़बाँसेअपनी
ख़ाकबसचेहरेपेमलतेरहिए
ज़ेहनभीशलकहींहोजाए
वक़्त-ज़ारोंसेनिकलतेरहिए
  - Alqama Shibli
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