sukoot-e-shaam ka hissa tu mat banaa mujh ko | सुकूत-ए-शाम का हिस्सा तू मत बना मुझ को

  - Ali Zaryoun
सुकूत-ए-शामकाहिस्सातूमतबनामुझको
मैंरंगहूँसोकिसीमौजमेंमिलामुझको
मैंइनदिनोंतिरीआँखोंकेइख़्तियारमेंहूँ
जमाल-ए-सब्ज़किसीतजरबेमेंलामुझको
मैंबूढेजिस्मकीज़िल्लतउठानहींसकता
किसीक़दीमतजल्लीसेकरनयामुझको
मैंअपनेहोनेकीतकमीलचाहताहूँसखी
सोअबबदनकीहिरासतसेकररिहामुझको
मुझेचराग़कीहैरतभीहोचुकीमालूम
अबइससेआगेकोईरास्ताबतामुझको
उसइस्म-ए-ख़ासकीतरकीबसेबनाहूँमैं
मोहब्बतोंकेतलफ़्फ़ुज़सेकरनयामुझको
दरून-ए-सीनाजिसेदिलसमझरहाथा'अली'
वोनीलीआगहैयेअबपताचलामुझको
  - Ali Zaryoun
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