ग़ुलाम तुम भी थे यारों ग़ुलाम हम भी थे

  - Ali Sardar Jafri
ग़ुलामतुमभीथेयारोंग़ुलामहमभीथे
नहाकेख़ूनमेंआईथीफ़स्ले-आज़ादी
मज़ातोतबथाकिजबमिलकर
इलाज-ए-जांकरते
ख़ुदअपनेहाथसे
तामीर-ए-गुलसितांकरते
हमारेदर्दमेंतुम
औरतुम्हारेदर्दमेंहमशरीक़होते
तोजश्न-ए-आशियांकरते
तुमआओगुलशन-ए-लाहौरसेचमनबर्दोश
हमआएँसुब्ह-ए-बनारसकीरौशनीलेकर
हिमालयकीहवाओंकीताज़गीलेकर
औरउसकेबादयेपूछें
कौनदुश्मनहै?
  - Ali Sardar Jafri
Share

profile-whatsappprofile-twitterprofile-fbprofile-copy