farogh-e-deeda-o-dil laalaa-e-sehr ki tarah | फ़रोग़-ए-दीदा-ओ-दिल लाला-ए-सहर की तरह

  - Ali Sardar Jafri
फ़रोग़-ए-दीदा-ओ-दिललाला-ए-सहरकीतरह
उजालाबिनकेरहोशम-ए-रहगुज़रकीतरह
पयम्बरोंकीतरहसेजियोज़मानेमें
पयाम-ए-शौक़बनोदौलत-ए-हुनरकीतरह
येज़िंदगीभीकोईज़िंदगीहैहम-नफ़सो
सिताराबनकेजलेबुझगएशररकीतरह
डरासकीमुझेतीरगीज़मानेकी
अँधेरीरातसेगुज़राहूँमैंक़मरकीतरह
समुंदरोंकेतलातुमनेमुझकोपालाहै
चमकरहाहूँइसीवास्तेगुहरकीतरह
तमामकोहतलबहरबरहैंज़ेर-ए-नगीं
खुलाहुआहूँमैंशाहींकेबाल-ओ-परकीतरह
तमामदौलत-ए-कौनैनहैख़िराजउसका
येदिलनहींकिसीलूटेहुएनगरकीतरह
गुज़रकेख़ारसेग़ुंचेसेगुलसेशबनमसे
मैंशाख़-ए-वक़्तमेंआयाहूँइकसमरकीतरह
मैंदिलमेंतल्ख़ी-ए-ज़हराब-ए-ग़मभीरखताहूँ
मिस्ल-ए-शहदहूँशीरींमैंशकरकीतरह
ख़िज़ाँकेदस्त-ए-सितमनेमुझेछुआहैमगर
तमामशो'लाशबनमहूँकाशमरकीतरह
मिरीनवामेंहैलुत्फ़-ओ-सुरूर-ए-सुब्ह-ए-नशात
हरएकशे'रहैरिंदोंकीशाम-ए-तरकीतरह
येफ़ातेहानाग़ज़लअस्र-ए-नौकाहैआहंग
बुलंदपस्तकोदेखाहैदीदा-वरकीतरह
  - Ali Sardar Jafri
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