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Ankit Yadav
mire chehre se kabhi uski udaasi na hate
mire chehre se kabhi uski udaasi na hate | मेरे चेहरे से कभी उसकी उदासी न हटे
- Ankit Yadav
मेरे
चेहरे
से
कभी
उसकी
उदासी
न
हटे
और
इक
वो
है
कि
सहरा
से
भी
प्यासी
न
हटे
नहीं
हटता
मिरे
होंटों
से
भी
सिगरेट
का
धुआँ
तेरी
दहलीज़
पे
बैठे
हुए
आसी
न
हटे
मैं
इसी
डर
से
तो
छूता
भी
नहीं
हूँ
वो
बदन
रहे
ताज़ा
वो
मेरे
पास
से
बासी
न
हटे
तेरे
रुख़्सार
पे
तिल
है
तेरे
चेहरे
से
नज़र
जब
हटाते
हैं
तो
लगता
है
ज़रा
सी
न
हटे
- Ankit Yadav
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वक़्त
की
गर्दिशों
का
ग़म
न
करो
हौसले
मुश्किलों
में
पलते
हैं
Mahfuzur Rahman Adil
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और
भी
दुख
हैं
ज़माने
में
मोहब्बत
के
सिवा
राहतें
और
भी
हैं
वस्ल
की
राहत
के
सिवा
Faiz Ahmad Faiz
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पत्थर
के
जिगर
वालो
ग़म
में
वो
रवानी
है
ख़ुद
राह
बना
लेगा
बहता
हुआ
पानी
है
Bashir Badr
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अपनी
हालत
का
ख़ुद
एहसास
नहीं
है
मुझ
को
मैं
ने
औरों
से
सुना
है
कि
परेशान
हूँ
मैं
Aasi Uldani
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कुल
जोड़
घटाकर
जो
ये
संसार
का
दुख
है
उतना
तो
मिरे
इक
दिल-ए-बेज़ार
का
दुख
है
शाइर
हैं
तो
दुनिया
से
अलग
थोड़ी
हैं
लोगों
सबकी
ही
तरह
हमपे
भी
घर
बार
का
दुख
है
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Ashutosh Vdyarthi
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हमारे
सैकड़ों
दुख
थे,
और
उस
में
एक
दुख
ये
भी
जो
हम
से
हो
के
गुज़रे
थे,
हमें
दीवार
कहते
थे
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Siddharth Saaz
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ये
किस
मक़ाम
पे
लाई
है
ज़िंदगी
हम
को
हँसी
लबों
पे
है
सीने
में
ग़म
का
दफ़्तर
है
Hafeez Banarasi
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जौन
तुम्हें
ये
दौर
मुबारक,
दूर
ग़म-ए-अय्याम
से
हो
एक
पागल
लड़की
को
भुला
कर
अब
तो
बड़े
आराम
से
हो
Jaun Elia
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बारे
दुनिया
में
रहो
ग़म-ज़दा
या
शाद
रहो
ऐसा
कुछ
कर
के
चलो
याँ
कि
बहुत
याद
रहो
Meer Taqi Meer
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अपनी
तबाहियों
का
मुझे
कोई
ग़म
नहीं
तुम
ने
किसी
के
साथ
मोहब्बत
निभा
तो
दी
Sahir Ludhianvi
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सिर्फ़
दिल
ही
नहीं
जले
हैं
यहाँ
रोज़
जलती
हैं
सिगरटें
कितनी
बस
यही
देखना
है
तेरे
बाद
दिल
में
बचती
हैं
औरतें
कितनी
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Ankit Yadav
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एक
शनासा
छूट
रहा
है
यार
असासा
छूट
रहा
है
हासिल
है
वो
ज़रा
ज़रा
सा
और
ज़रा
सा
छूट
रहा
है
चख
ली
है
होंठों
की
मिसरी
सिर्फ़
बतासा
छूट
रहा
है
सहराओं
में
बारिश
हुई
है
जंगल
प्यासा
छूट
रहा
है
मेरे
अंदर
तेरा
हिस्सा
अच्छा
ख़ासा
छूट
रहा
है
तुम
भी
कुछ
तो
सोचो
अंकित
हाथ
से
कासा
छूट
रहा
है
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Ankit Yadav
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इसलिए
दूर
हूँ
जवाबों
से
फिर
न
तेरा
सवाल
आ
जाए
Ankit Yadav
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दिल
को
आज
परिंदा
कर
दो
ज़िंदा
कर
दो
या
दिल
का
बाशिंदा
कर
दो
ज़िंदा
कर
दो
मुँह
को
ख़ून
लगा
कर
अपने
हाथ
न
खींचो
मुझको
और
दरिंदा
कर
दो
ज़िंदा
कर
दो
चीख़
रहे
हैं
मेरे
ज़ेहन-ओ-दिल
और
होंठ
मुझको
छू
कर
ज़िंदा
कर
दो
ज़िंदा
कर
दो
अपने
सुर्ख़
लबों
से
मेरी
ग़ज़लें
पढ़
कर
मेरे
शे'र
चुनिंदा
कर
दो
ज़िंदा
कर
दो
दुश्मन
अच्छा
हो
तो
उसको
मार
न
डालो
बस
उसको
शर्मिंदा
कर
दो
ज़िंदा
कर
दो
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Ankit Yadav
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उसका
आँचल
हो
जाता
है
जैसे
बादल
हो
जाता
है
वो
कहती
है
पागल
पागल
और
दिल
पागल
हो
जाता
है
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Ankit Yadav
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