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Aktar ali
jab koii ham-kalaam hota hai
jab koii ham-kalaam hota hai | जब कोई हम-कलाम होता है
- Aktar ali
जब
कोई
हम-कलाम
होता
है
पहले
मेरा
सलाम
होता
है
हो
कोई
छोटा
या
बड़ा
मुझ
सेे
मुझ
से
पर
एहतिराम
होता
है
उसको
फ़ुर्सत
नहीं
है
मिलने
की
मुझको
भी
रोज़
काम
होता
है
कौन
करता
है
काम
मर्ज़ी
से
पेट
का
इंतज़ाम
होता
है
मेरी
हसरत
की
रह
गई
हसरत
क्योंकि
हसरत
का
दाम
होता
है
- Aktar ali
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बहाने
और
भी
होते
जो
ज़िंदगी
के
लिए
हम
एक
बार
तिरी
आरज़ू
भी
खो
देते
Majrooh Sultanpuri
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दिल-लगी
में
हसरत-ए-दिल
कुछ
निकल
जाती
तो
है
बोसे
ले
लेते
हैं
हम
दो-चार
हँसते
बोलते
Munshi Amirullah Tasleem
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ये
आरज़ू
भी
बड़ी
चीज़
है
मगर
हमदम
विसाल-ए-यार
फ़क़त
आरज़ू
की
बात
नहीं
Faiz Ahmad Faiz
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कुछ
इस
लिए
भी
तेरी
आरज़ू
नहीं
है
मुझे
मैं
चाहता
हूँ
मेरा
इश्क़
जावेदानी
हो
Vipul Kumar
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बे-आरज़ू
भी
ख़ुश
हैं
ज़माने
में
बाज़
लोग
याँ
आरज़ू
के
साथ
भी
जीना
हराम
है
Shuja Khawar
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आरज़ू'
जाम
लो
झिजक
कैसी
पी
लो
और
दहशत-ए-गुनाह
गई
Arzoo Lakhnavi
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ग़म-ए-ज़माना
ने
मजबूर
कर
दिया
वर्ना
ये
आरज़ू
थी
कि
बस
तेरी
आरज़ू
करते
Akhtar Shirani
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उसकी
हसरत
है
जिसे
दिल
से
मिटा
भी
न
सकूँ
ढूँडने
उसको
चला
हूँ
जिसे
पा
भी
न
सकूँ
Ameer Minai
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'असद'
ये
शर्त
नहीं
है
कोई
मुहब्बत
में
कि
जिस
सेे
प्यार
करो
उसकी
आरज़ू
भी
करो
Subhan Asad
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नाज़-ओ-नख़रे
क्या
उठाए,
क्या
सुने
उस
के
गिले
देखते
ही
देखते
लड़की
घमंडी
हो
गई
देखते
रहने
में
उस
को
और
क्या
होता,
मगर
जो
थी
जान-ए-आरज़ू,
वो
चाय
ठंडी
हो
गई
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Kazim Rizvi
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ख़ुदा
का
शुक्र
है
जो
मिल
रहा
है
उसी
में
हम
गुज़ारा
कर
रहे
हैं
Aktar ali
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मेरे
मौला
ये
क्यूँँ
पैहम
लिखा
है
मेरी
तक़दीर
में
बस
ग़म
लिखा
है
Aktar ali
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तितलियाँ
रक़्स
करने
लगती
हैं
ज़िक्र
जब
मुस्तफ़ा
का
होता
है
Aktar ali
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उम्र
जब
तक
जहान
में
गुज़रे
पर
तिरे
दरमियान
में
गुज़रे
दर
गुज़र
करना
आदतें
मेरी
कोई
लग़्ज़िश
जो
ध्यान
में
गुज़रे
सादगी
आदमी
की
ज़ीनत
है
तो
भला
क्यूँँ
गुमान
में
गुज़रे
यार
सौ
झूठ
से
ये
अफ़ज़ल
है
एक
सच
वो
जो
मान
में
गुजरे
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Aktar ali
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ये
ज़मीं
आसमान
है
कब
तक
तेरा
नाम-ओ-निशान
है
कब
तक
उसकी
जानिब
से
है
तमाशा
सब
वर्ना
ये
इम्तिहान
है
कब
तक
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Aktar ali
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