teraa har raaz chhu | तेरा हर राज़ छुपाए हुए बैठा है कोई

  - Akhtar Siddiqui
तेराहरराज़छुपाएहुएबैठाहैकोई
ख़ुदकोदीवानाबनाएहुएबैठाहैकोई
साक़ी-ए-बज़्मकेमख़्सूसइशारोंकीक़सम
जामहोंटोंसेलगाएहुएबैठाहैकोई
इसनुमाइश-गह-ए-आलममेंकमीहैअबतक
अश्कआँखोंमेंछुपाएहुएबैठाहैकोई
शबकीदेवीकासुकूतऔरहीकुछकहताहै
फिरभीदोशमएँजलाएहुएबैठाहैकोई
मेरीइकआरज़ू-ए-दीदकाए'जाज़पूछ
मुँहकोहाथोंसेछुपाएहुएबैठाहैकोई
यादभीतेरीइकआज़ार-ए-मुसलसलहैमगर
अपनेसीनेसेलगाएहुएबैठाहैकोई
हमकोमा'लूमहै'अख़्तर'किहमारीख़ातिर
एकआलमकोभुलाएहुएबैठाहैकोई
  - Akhtar Siddiqui
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