na chhed zaahid-e-naadaan sharaab peene de | न छेड़ ज़ाहिद-ए-नादाँ शराब पीने दे

  - Akhtar Shirani
छेड़ज़ाहिद-ए-नादाँशराबपीनेदे
शराबपीनेदेख़ाना-ख़राबपीनेदे
अभीसेअपनीनसीहतकाज़हरदेमुझे
अभीतोपीनेदेऔरबे-हिसाबपीनेदे
मैंजानताहूँछलकताहुआगुनाहहैये
तूइसगुनाहकोबे-एहतिसाबपीनेदे
फिरऐसावक़्तकहाँहमकहाँशराबकहाँ
तिलिस्म-ए-दहरहैनक़्श-ए-बर-आबपीनेदे
मिरेदिमाग़कीदुनियाकाआफ़्ताबहैये
मिलाकेबर्फ़मेंयेआफ़्ताबपीनेदे
किसीहसीनाकेबोसोंकेक़ाबिलअबरहे
तोइनलबोंसेहमेशाशराबपीनेदे
समझकेउसकोग़फ़ूर-उर-रहीमपीताहूँ
छेड़ज़िक्र-ए-अज़ाब-ओ-सवाबपीनेदे
जोरूहहोचुकीइकबारदाग़-दारमिरी
तोऔरहोनेदेलेकिनशराबपीनेदे
शराब-ख़ानेमेंयेशोरक्यूँँमचायाहै
ख़मोश'अख़्तर'-ए-ख़ाना-ख़राबपीनेदे
  - Akhtar Shirani
Share

profile-whatsappprofile-twitterprofile-fbprofile-copy