aarzoo vasl ki rakhti hai pareshaan kya kya | आरज़ू वस्ल की रखती है परेशाँ क्या क्या

  - Akhtar Shirani
आरज़ूवस्लकीरखतीहैपरेशाँक्याक्या
क्याबताऊँकिमिरेदिलमेंहैंअरमाँक्याक्या
ग़मअज़ीज़ोंकाहसीनोंकीजुदाईदेखी
देखेंदिखलाएअभीगर्दिश-ए-दौराँक्याक्या
उनकीख़ुशबूहैफ़ज़ाओंमेंपरेशाँहरसू
नाज़करतीहैहवा-ए-चमनिस्ताँक्याक्या
दश्त-ए-ग़ुर्बतमेंरुलातेहैंहमेंयादकर
वतनतेरेगुलसुम्बुलरैहाँक्याक्या
अबवोबातेंवोरातेंमुलाक़ातेंहैं
महफ़िलेंख़्वाबकीसूरतहुईंवीराँक्याक्या
हैबहार-ए-गुल-ओ-लालामिरेअश्कोंकीनुमूद
मेरीआँखोंनेखिलाएहैंगुलिस्ताँक्याक्या
हैकरमउनकेसितमकाकिकरमभीहैसितम
शिकवेसुनसुनकेवोहोतेहैंपशीमाँक्याक्या
गेसूबिखरेहैंमिरेदोशपेकैसेकैसे
मेरीआँखोंमेंहैंआबादशबिस्ताँक्याक्या
वक़्त-ए-इमदादहैहिम्मत-ए-गुस्ताख़ी-ए-शौक़
शौक़-अंगेज़हैंउनकेलब-ए-ख़ंदाँक्याक्या
सैर-ए-गुलभीहैहमेंबाइस-ए-वहशत'अख़्तर'
उनकीउल्फ़तमेंहुएचाकगरेबाँक्याक्या
  - Akhtar Shirani
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