ki justuju to ek naya ghar mila mujhe | की जुस्तुजू तो एक नया घर मिला मुझे

  - Akhtar Saeedi
कीजुस्तुजूतोएकनयाघरमिलामुझे
बरसोंकेबा'दमेरामुक़द्दरमिलामुझे
जबतिश्नगीबढ़ीतोमसीहाथाकोई
जबप्यासबुझगईतोसमुंदरमिलामुझे
दुनियामिरेख़िलाफ़नबर्द-आज़मारही
लेकिनवोएकशख़्सबराबरमिलामुझे
ज़ख़्म-ए-निगाहज़ख़्म-ए-हुनरज़ख़्म-ए-दिलकेबा'द
इकऔरज़ख़्मतुझसेबिछड़करमिलामुझे
नाज़ुक-ख़यालियोंकीमुझेयेसज़ामिली
शीशातराशनेकोभीपत्थरमिलामुझे
  - Akhtar Saeedi
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