taveel-tar hai safar mukhtasar nahin hota | तवील-तर है सफ़र मुख़्तसर नहीं होता

  - Akhtar Amaan
तवील-तरहैसफ़रमुख़्तसरनहींहोता
मोहब्बतोंकाशजरबे-समरनहींहोता
फिरउसकेब'अदकईलोगमिलकेबिछड़ेहैं
किसीजुदाईकादिलपरअसरनहींहोता
हरएकशख़्सकीअपनीहीएकमंज़िलहै
कोईकिसीकायहाँहम-सफ़रनहींहोता
तमामउम्रगुज़रजातीहैकभीपलमें
कभीतोएकहीलम्हाबसरनहींहोता
येऔरबातहैवोअपनाहाल-ए-दिलकहे
कोईभीशख़्सयहाँबे-ख़बरनहींहोता
अजीबलोगहैंयेअहल-ए-इश्क़भी'अख़्तर'
किदिलतोहोताहैपरइनकासरनहींहोता
  - Akhtar Amaan
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