lafzon ke sitam lahjon ke aazaar bahut hain | लफ़्ज़ों के सितम लहजों के आज़ार बहुत हैं

  - Akhlaq Aatif
लफ़्ज़ोंकेसितमलहजोंकेआज़ारबहुतहैं
कहनेकोतोइसशहरमेंग़म-ख़्वारबहुतहैं
कुछअपनेहीदुनियामेंनहींइतनेज़ियादा
कुछउनमेंसेभीशामिल-ए-अग़्यारबहुतहैं
हरसम्तसपेरेहैंजमाएहुएडेरे
इसशहरमेंसाँपोंकेख़रीदारबहुतहैं
हरसम्तसेतूफ़ानकीआमदकीहैंख़बरें
अबमानलोहमलोगगुनहगारबहुतहैं
इकहमहीनहींशहर-ए-सितम-साज़में'आतिफ़'
बे-जुर्मसज़ाओंकेसज़ा-वारबहुतहैं
  - Akhlaq Aatif
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