paiham ik iztiraab ajab khushk-o-tar men tha | पैहम इक इज़्तिराब अजब ख़ुश्क-ओ-तर में था

  - Akbar Haideri Kashmiri
पैहमइकइज़्तिराबअजबख़ुश्क-ओ-तरमेंथा
मैंघरमेंरुकाथामिराघरसफ़रमेंथा
क्यारौशनीथीजिसकोयेआँखेंतरसगईं
क्याआगथीकिजिसकाधुआँमेरेसरमेंथा
बसएकधुँदख़्वाबोंकीफ़िक्र-ओ-ख़यालमें
बसएकलम्सदर्दकाशाम-ओ-सहरमेंथा
हरअहदकोसमेटेहुएचलरहाथामैं
नादीदासाअ'तोंकाउजालानज़रमेंथा
हरलम्हाथातलाशकीसदियाँलिएहुए
मेरीबक़ाकाराज़हीइल्म-ओ-ख़बरमेंथा
  - Akbar Haideri Kashmiri
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