hawaa-e-shab bhi hai ambar-afshaan urooj bhi hai mah-e-mubeen ka | हवा-ए-शब भी है अम्बर-अफ़्शाँ उरूज भी है मह-ए-मुबीं का

  - Akbar Allahabadi
हवा-ए-शबभीहैअम्बर-अफ़्शाँउरूजभीहैमह-ए-मुबींका
निसारहोनेकीदोइजाज़तमहलनहींहैनहींनहींका
अगरहोज़ौक़-ए-सुजूदपैदासिताराहोऔजपरजबींका
निशान-ए-सज्दाज़मीनपरहोतोफ़ख़्रहैवोरुख़-ए-ज़मींका
सबाभीउसगुलकेपासआईतोमेरेदिलकोहुआयेखटका
कोईशगूफ़ायेखिलाएपयामलाईहोकहींका
मेहरमहपरमिरीनज़रहैलाला-ओ-गुलकीकुछख़बरहै
फ़रोग़-ए-दिलकेलिएहैकाफ़ीतसव्वुरउसरू-ए-आतिशींका
इल्म-ए-फ़ितरतमेंतुमहोमाहिरज़ौक़-ए-ताअतहैतुमसेज़ाहिर
येबे-उसूलीबहुतबुरीहैतुम्हेंरक्खेगीयेकहींका
  - Akbar Allahabadi
Share

profile-whatsappprofile-twitterprofile-fbprofile-copy