sochte hain baith ke dariyaa kinaare | सोचते हैं बैठ के दरिया किनारे

  - AKASH
सोचतेहैंबैठकेदरियाकिनारे
काटलेंगेज़ीस्तयादोंकेसहारे
शे'रग़ज़लेंऔरनज़्मेंयेहमारी
सबहमारेहैंग़मोंकेइस्तिहारे
देखताहैकौनउनकीरौशनीको
चाँदसेजोदूररहतेहैंसितारे
हमनहींरखतेपरिंदेकोक़फ़समें
चलतेआयाहैबुज़ुर्गोंसेहमारे
शायरोंकाकामहीहोतायहीहै
देखतेहैंज़िन्दगीभरराहप्यारे
  - AKASH
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